पर्यवलोकन
जनसंख्या
अवधारणा
का
परिचय
एक
बिलियन
से अधिक
जनसंख्या
वाला
देश,
जिसमें
से लगभग
आधी
जनसंख्या
उत्पादनकारी
आयु
वर्ग की
हो, एक
उद्यमी
और
तीव्र
गतिशील
भारत
बनना
चाहिए।
परंतु
क्या
इतनी
जनसंख्या
हमारी
ताकत हो
सकती है
जबकि 36
प्रतिशत
भारतीय
अशिक्षित
हैं, चार
बच्चों
में से
एक
बच्चा
विद्यालय
जाता ही
नहीं और
जो
बच्चे
विद्यालय
में
दाखिला
लेते
हैं
उनमें
से 60
प्रतिशत
बच्चे
पांचवी
स्तर तक
पहुंच
पाते
हैं।
गरीबी,
अशिक्षा
और
गंदगी
मेंरहने
वाले
लोग
किसी
देश की
ताकत
नहीं बन
सकते।
भारत ओर
चीन
केवल दो
देश ही
ऐसे हैं
जिनकी
जनसंख्या
एक
बिलियन
से अधिक
है।
प्रचलित
प्रवृत्ति
यह
दर्शाती
है कि
आगामी
कुछ
दशकों
में
भारत की
जनसंख्या
चीन से
अधिक हो
जाएगी।
आज
भी देश
में 20
प्रतिशत
दंपत्ती
निरंतर
बच्चे
पैदा कर
रहे हैं,
वे इस पर
रोक
नहीं
लगाना
चाहते
क्योंकि
गर्भ
निरोधक
सेवाएं
उन तक
नहीं
पहुंच
पाती।
संयुक्त
राष्ट्र
मानव
विकास
रिपोर्ट
2006 में
भारत को
मानव
विकास
सूची
में
बहुत
नीचे की
श्रेणी
में रखा
गया है,
तथा
जीवन की
संभावना,
विद्यालय-नामांकन,
साक्षरता
और आय
जैसे
मुख्य
पैरामीटरों
को
शामिल
किया
गया है।
भारत
177 देशों
वाली
सूची
में 126
वें
स्थान
पर है।
यदि इस
स्तर को
बदलना
है तो
हमें
स्वास्थ्य,
जनसंख्या
और
सामाजिक
विकास
से
संबंधित
मर्म
विषयों
को हल
करना
होगा।
जनसंख्या
स्थिरता
कोष, सामग्री
और छवि
का
निःशुल्क
उपयोग
करने की
अनुमति
देने के
लिए
जनसंख्या
प्रथम,
शेट्टी
हाउस
तीसरी
माला, 101
महात्मा
गांधी
मार्ग,
फोर्ट,
मुंबई, 400023
के
प्रति
कृतज्ञ
है।
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